

आयुर्वेदिक संरेखण
वैदिक ज्योतिष और आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथों में वात, पित्त और कफ का सीधा संबंध नवग्रहों की प्रकृति से वर्णित है। सूर्य और मंगल अग्नि तत्व तथा पित्त दोष का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि चंद्रमा और शुक्र जल तत्व एवं कफ दोष को संतुलित या प्रभावित करते हैं।
दशा चक्रों का विश्लेषणात्मक अध्ययन यह समझने में सहायता करता है कि शरीर किस समय विशेष ऊर्जात्मक संवेदनशीलता के दौर से गुजर रहा है।
विश्लेषणात्मक ढांचा
12 भाव और शारीरिक प्रणालियाँ
12 भाव
शरीर के अंगों का शास्त्रीय विभाजन
3 दोष
वात, पित्त और कफ की संवैधानिक प्रकृति
9 ग्रह
ऊर्जात्मक प्रभाव एवं समय चक्र
अकादमिक एवं नैतिक दृष्टिकोण
ज्योतिष ऊर्जात्मक संवेदनशीलता को दर्शाता है; आधुनिक चिकित्सा निदान और उपचार प्रदान करती है। हम दोनों पद्धतियों का पूर्ण सम्मान करते हैं।
हमारा उद्देश्य किसी भी प्रकार के चमत्कारिक उपचार का दावा करना नहीं है, बल्कि केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य प्रवृत्तियों का नैतिक एवं प्रामाणिक अध्ययन प्रस्तुत करना है।
